100 Very Short Moral Stories In Hindi for class प्रसिद्ध कहानियाँ

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हिंदी में नवीनतम सर्वश्रेष्ठ नैतिक कहानियां  इस लेख में very short moral stories in Hindi for class 7 के  बच्चों को नई  सीख  देने का एक शानदार तरीका है। ये प्रेरणादायक शिक्षाप्रद  नैतिक कहानियाँ बच्चों और वयस्कों के लिए नैतिक संग्रह के साथ हिंदी में महान लघु कथाएँ हैं।

बहुत ही कम नैतिक कहानियां आप सभी पीढ़ी और परिवार के लिए उच्च गुणवत्ता वाले नैतिक कहानियों की एक किस्म, विशेष रूप से अपने युवा की छोटी कहानियां.हम आपके साथ अपने बचपन की पंचतंत्र की 50  प्रसिद्ध कहानियाँ शेयर कर रहा हूँ. ये कथाएं  बच्चो के लिए रोचक तथा मनोरंजन एवं ज्ञानवर्धाक  है।

पर साथ ही प्रत्येक अवस्था के लिए उपयोगी है, जो मुझे बहुत पसंद है. इन कहानियों को पढने से न सिर्फ आपको मजा आएगा बल्कि आपको ज्ञान भी मिलेगा?

हम यहां अपने ब्लॉग में Very Short Moral Stories In Hindi for class 7 सर्वश्रेष्ठ नैतिक कहानियां प्रदान करने के लिए हैं। हमने बच्चों के लिए लघु नैतिक कहानियाँ एकत्र की हैं। नई नैतिक कहानियों के ये संग्रह आपको सर्वोत्तम मूल्य प्रदान करते हैं.

इस  लघु कहानी  में  Moral Stories For Kids In Hindi बच्चों में समान नैतिक मूल्य और गुण। (जीवन बदलने वाली कहानियाँ)  एक वृक्ष की तरह  इन छोटी कहानियों के माध्यम से, विचार हमारी संस्कृति की महानता का वर्णन करता है। इसके माध्यम से जीवन के विभिन्न पहलुओं को जान सकते हैं।
 

very short moral stories in Hindi for class 7 प्रसिद्ध कहानियाँ


very short moral stories in Hindi for class 7




कहानी :(1)  बुद्धि मानी का फल - मेंढकों का राजा 

एक  तालाब  में  बहुत से मेंढ़क रहा करते थे। मछली केकड़े आदि से जीव  बहुत आराम से, एक साथ मिल-जुल कर रहा करते थे।  किसी को  कोई हानि नहीं पहुँचाता था। एक दिन  समुदाय में बदलाव के लिए उनमें से कुछ मेढ़क एक राजा चाहते थे। पर  उनके जीवन में शान्ति ही शान्ति थी,  फिर भी वह सभी अपने लिए एक राजा नियुक्त करना चाहते थे, जो हर मेंढको के ऊपर नजर रखें और  समुदाय में  अनुशासन बना बनाये रखें। 
 

 मेंढकों ने प्रार्थना की  ''हे देवदूत ! हमें  एक राजा दीजिए।” मेंढकों को इस प्रकार टर्राते देख देवदूत हँसने लगे और एक लकड़ी का बड़ा टुकड़ा तालाब में गिरा दिया। सारे मेंढ़क लकड़ी नीचे दब गये। फिर भी  मेंढको ने शान्त नहीं हुए और टर्र टर्र करने लगे  राजा की माँग  पर देवदूत ने एक सारस  को राजा नियुक्त कर दिया। सारस  सभी मेंढकों पर नजर रखता जैसे ही कोई मेंढक ज्यादा उछल कूद करता , उसे खा जाता। इस प्रकार एक- एक करके सारस  सारे  मेढ़क खा गया। 


short Moral of story: इस कहानी की शिक्षा:-  जितना मिले उसी में संतुष्ट और खुश रहना चाहिए। बेकार की चीजों पर हमें अपने ज्यादा बुद्धिमानी नहीं दिखाना चाहिए नहीं तो मेंढकों जैसे हो जाएगा ?
 
 
(2)(अच्छे लोग, बुरे लोग  पहचान ) शिक्षाप्रद कहानी 

Hindi short stories with moral for Kids

 

बहुत समय पहले की बात है। एक बार एक साधु बाबा  नदी
किनारे रहता था नदी किनारे एक  सुन्दर गांव था  सुबह सुबह नदी में शिष्य स्नान कर रहे. उसी नदी किनारे तभी एक राहगीर आया और उनसे पूछा,साधु बाबा इस
गांव में कैसे लोग निवास  करते है। राहगीर" दरअसल, मैं अपने मौजूदा
निवास स्थान से कहीं और जाना चाहता हूं?'

साधु बाबा  बोले,
'जहां तुम अभी रहते हो, वहां किस प्रकार के लोग निवास  करते  हैं?'
मत पूछिए साधु बाबा, 'वहां तो एक " से एक कपटी, दुष्ट दुराचार  और बुरे लोग उस गांव में  बसे हुए है। राहगीर बोला।

साधु बाबा जी बोले, 'इस गांव में भी बिलकुल उसी तरह के
लोग रहते हैं,  दुराचरी कपटी, दुष्ट, और  बुरे लोग निवास करते है।'

 राहगीर : यह सुनकर  कुछ नहीं बोला और आगे बढ़ गया। कुछ दिन   
बाद उसी रास्ते पर  दूसरा राहगीर वहां से गुजरा। उसने भी  साधु बाबा  जी से वही प्रश्न पूछा,

नयी जगह में रहना है, क्या आप बता सकते हैं.  इस गांव में कैसे लोग
रहते हैं?' बाबा जी बोले  'जहां तुम अभी निवास करते हो वहां किस प्रकार के लोग रहते हैं?" 'जी, वहां तो बड़े सभ्य, सुलझे और अच्छे लोग रहते हैं।' राहगीर बोला ।

'तुम्हें बिलकुल उसी प्रकार के लोग यहां भी मिलेंगे, सभ्य, सुलझे और अच्छे ।'
बाबा जी  ने अपनी बात पूर्ण की और दैनिक कार्यों में लग गए। पर उनके शिष्य ये सब देख और सुन रहा था। राहगीर के जाते ही  शिष्य ने  पूछा, 'क्षमा कीजियेगा  साधु बाबा जी, पर आपने दोनों राहगीरों को एक ही स्थान के बारे में अलग-अलग बातें क्यों बतायी।

साधु बाबा जी  ने गंभीरता से बोले, देखो  'शिष्यो, आमतौर पर हम चीजों को वैसे नहीं देखते हैं जैसी वे हैं। बल्कि उन्हें हम ऐसे देखते हैं जैसे कि हम खुद हैं।

 हर जगह हर प्रकार के लोग  निवास करते करते हैं, हमारे विचार और  यह हम पर निर्भर करता है कि हम किस तरह के लोगों को देखना पसंद करते है. शिष्य  साधु बाबा जी  की बात समझ गया  और आगे से उन्होंने जीवन में सिर्फ अच्छाइयों पर ही ध्यान केन्द्रित करने का निश्चय किया।



शिक्षाप्रद कहानी  की सिख :-  अच्छाई और बुराई मनुष्य के विचार में निवास करती है।  अच्छे लोगों के साथ हमेशा अच्छा होता है। आप किसी का बुरा नहीं करते तो आपका बुरा कैसे हो सकता है। 
 


(3) short story in Hindi

चतुर खरगोश और भोली बकरी 

(जो करे धर्म उसका फूटे करम ) 




एक बार एक खरगोश किसी दुर्घटना के कारण एक कुएँ में गिर गई। वह कुएँ से निकलने का अथक प्रयास करने लगी पर निकल नहीं पाई। तभी वहां से एक बकरी गुजरी। बकरी ने खरगोश को कुँए में देखकर पुछा- कुएँ में तुम क्या कर रही हो ?  बड़ी चालाकी से खरगोश ने उत्तर दिया –तुम्हें पता नहीं हैं? भारी मात्रा में सुखा पड़ने वाला है। अत: देव दूत कहा है, इसलिए मैं  देखने आई हूँ,  मेरे लायक पानी है या नहीं  मेरी बात मानो  तो  तुम भी नीचे आ जाओं। 
 


खरगोश की बात पर विचार कर बकरी तुरंत कुएं में कूद गई। जैसे ही बकरी कुएँ में गिरी,खरगोश उसकी पीठ पर चढ़ गई, फिर  सींघों पर पैर रखकर कुएँ की दीवार पर चढ़  गया और  बाहर निकलने में सफल  हो गया । बाहर निकलकर बकरी से कहा -  याद रखना दोस्त “ये सबक - अलविदा !”
 
 

short Moral of story: इस कहानी की  शिक्षा :- जो करे धर्म उसका फूटे: करम चतुर खरगोश की इस कहानी से सीख मिलती है कि मुसीबत में फंसे हुए की सलाह बिना सोचें समझे  कभी विश्वास नहीं करना चाहिए। बिना सोचे विचारे कार्य किये सो बाद में पस्चताप करता ( जब चिड़िया चुग गई खेत )  किसी इंसान हो या जानवर अपने स्वार्थ के लिए दूसरे जीव को कष्ट में नहीं डालना चाहिए।




(4) विपरीत परिस्थितियां 

Short moral stories in Hindi

 

एक समय की बात है: (कारीगरी) एक मूर्ति बनाने के लिए जंगल में पत्थर ढूंढने के लिए गया। वहां उसे मूर्ति बनाने के लिए एकअच्छा पत्थर मिल गया।

कारीगरी: पत्थर लेके वापस घर आते समय  रास्ते में से एक ओर पत्थर साथ उठा लाया।  और कारीगरी ने पत्थर को मूर्ति बनाने के लिए छेनी हथौड़ी से उस पत्थर पर  ठोकर  करने लगा।

 कारीगरी की छेनी और हथौड़ी से पत्थर को चोट लगने लगी तो पत्थर ने दर्द से  कारीगरी से बोला, “अरे भाई मेरे से यह दर्द सहा नहीं जाता, ऐसे तो मैं बिखर जाऊंगा। तुम किसी और पत्थर की मूर्ति बना दो। 

 पत्थर की बात सुनकर कारीगरी को दया आ गई। और उस  पत्थर को छोड़कर दूसरे पत्थर को बनाना शुरू कर दी। दूसरे पत्थर ने कुछ भी नहीं बोला। कारीगरी ने थोड़े ही समय में एक भगवान की मूर्ति बना दी।

पास के गांव के लोग तैयार मूर्ति को लेने के लिए आए। और  मूर्ति को लेकर निकलने वाले थे। पर ख्याल आया कि नारियल फोड़ने के लिए भी एक पत्थर की जरूरत होगी तो वहां पर रखा पहले वाला पत्थर भी उन्होंने अपने साथ ले लिया।

मूर्ति को ले जाकर उन्होंने मंदिर में सजा दिया और पहले वाले पत्थर को भी सामने रख दिया।

मंदिर में जब भी कोई व्यक्ति दर्शन करने आते तो मूर्ति पर फूल माला चढ़ाते, दूध से नहलाते और उसकी पूजा करते। सामने वाले पत्थर पर नारियल फोड़ते हैं।
अब पहले वाले पत्थर को हर रोज दर्द सहना पड़ता था।

 मूर्ति वाले पत्थर से कहा: तुम्हारे तो मजे है।  फूल माला से सजते हों, रोज तुम्हारी पूजा होती हैं। मेरी तो साला किस्मत ही खराब हैं। हर रोज लोग नारियल फोड़ते हैं और मेरे को दर्द सहना पड़ता है।

पहले वाले पत्थर की बात सुनकर मूर्ति बने पत्थर ने कहा:-
कास  उस दिन तूने कारीगरी के हाथ का दर्द सह लिया  होता  तो आज तुम्हें ये  दिन  देखना  नहीं पड़ता। तुम मेरी जगह पर होते।  थोड़े से समय के दर्द को सहन कर लिया होता पर आप तो आसान रास्ते को चुना। पर उसका भुकतान भुगत रहे हो।

इस कहानी कि  शिक्षा:   हमारे जीवन में भी कई कठिनाइयां कई विपरीत परिस्थितियां  आती है।  जो हमें बहुत सारा दर्द भी झेलना पड़ सकता है। पर हमें इनसे डरकर पीछे नहीं हटना है, 

पर  इनका डट कर  मुकाबला सामना  करना चाहिए । यह विपरीत परिस्थितियां हमें! और ज्यादा मजबूत बनाएगी। जिससे हम अपनी मंजिल के और ज्यादा करीब पहुंच जाएंगे।

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          (5) अक्ल  बड़ी या भैस बड़ी  (नकल में अकल 

         Short Story in Hindi | Moral Stories

 
एक पर्वत  ऊंची सिखर  पर एक गिद्ध  रहता था। पर्वत  पर एक  बरगद के पेड़ पर एक कौआ घोंसला बनाकर रहता था।  चालाक और धूर्त था। उसका प्रयास  बिना परिश्रम के खाने को मिल जाए। पेड़ के दुरी पर चूहा  भी रहता था। जब भी चूहा  के बच्चे बाहर आते तो गिद्धः ऊंची उड़ान भरते और एकाध चूहे  को उठाकर ले जाते।

 कौए ने सोचा, एक दिन ‘वैसे तो ये चालाक चूहा  मेरे हाथ आएंगे नहीं, अगर इनका नर्म मांस खाना है तो मुझे भी गिद्ध की तरह करना होगा। एकाएक झपट्टा मारकर पकड़ लूंगा।’

दूसरे दिन कौए ने भी एक चूहा  को दबोचने की बात सोचकर ऊंची उड़ान भरी। फिर उसने चूहा  को पकड़ने के लिए गिद्ध  की तरह ज़ोर से झपट्टा मारा। भला कौआ गिद्ध  का  मुकाबला  क्या करता। चूहा  ने उसे देख लिया और झट वहां से भागकर चट्टान के पीछे छिप गया। कौआ अपनी ही जोश  में उस चट्टान से जा टकराया। उसकी चोंच  गरदन टूट गईं परिणामस्वरूप  वहीं तड़प - तड़प कर दम तोड़ दिया।

Moral of story :इस कहानी की शिक्षा:-  नकल में अक्ल की जरुरत होती कहावत है : अक्ल बड़ी या भैस बड़ी  नक़ल से  जिन्दगी में  कुछ भी कोई  हासिल नहीं कर सकता हैं।इस लिए दुसरो का नक़ल सोंच समझ के करना चाहिए नहीं तो कौए जैसा हो सकता है। 



कहानी: (6) 🐐 बुद्धिमान बकरी  

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एक गाँव एक बकरी रहती उसकी तीन बच्चे थी गाँव से थोड़ी दुरी पर एक भयानक जंगल था। बकरी को हमेशा डर लगी रहती थी कही उनके बच्चे खेलते - खेलते जंगल के तरफ न चले जाएँ और वह हर समय समझती रहती थी।ध्यान से सुनों उस  जंगल के तरफ भूल से भी मत तुम्हारे लायक ओ जगह ठीक नहीं है। 

एक दिन बकरी के एक बच्चे खेलते - खेलते हरे भरे घास खाती  हुई जंगल की ओर लिकल गई। चार लकड़ बाघा ने बकरी के बच्चे को घेर लिया आज तो मजे से भोजन करेंगे।  बकरी के बच्चे को लकड़ बाघा झपटने वाला ही था की बकरी की माँ आ गई एक लकड़ बाघा ने अरे एक के साथ एक फ्री 


कह कर हसने लगे बेचारी बकरी की बच्ची डर से चिल्ला रही थी। .बकरी की माँ ने कहा - तुम सब हमें मिल मिल कर खा सकते पर पर सोंच समझ हम पर हाँथ लगाना, हम दोनों  शेर महराज की भोजन पर जा रहे है। एक लड़क बाघा ने शेर को कौन बताएगा यदि तुन्हे खा जायेंगे तो बकरी इधर उधर देखने लगी  और ओ देखो हमारी निगरानी में एक  कौआ बैठा हुआ है। कौआ को देख लकड़ बाघा शेर के डर से पूंछ हिलाते हुये जंगल  ओर चारो भागने लगे  शेर से बैरे कौन ले भैया। जान बची तो लाखों  उपाए ?



बकरी और उनकी बच्ची गाँव की ओर जाने लगी रस्ते में एक कुआँ मिला बकरी ने पानी पिने जा रही थी तब राजा शेर आ गया बकरी को देख कर  शेर बड़ा खुस हो गया से झपटने वाला ही था तब बकरी ने कहा महाराज आप ये भूल मत करना हमें खाने की कोशिस न करना आप से भी बड़ा से यहां पर है। हम उनके लिए यहाँ पर आये है। तुम्हे विश्वास नहीं हो रही है तो आप कुँआ के पास जा के देखो शेर ने कुँआ के पास गया निचे झाकने लगा 

 पानी में शेर का छाया दिखने लगा शेर ने सोचा की सच में एक और शेर है। शेर ने दहाड़ ने लगा कुँआ में  से उसकी आवाज वापस डबल सुनाई दिया।  शेर के पीछे से  धुँआ निकल और पूंछ उठा कर भागा सही सलामत बकरी गाँव वापस आ गई। 
 
 

short Moral of story: इस कहानी की  शिक्षा:-  मित्रों - अपने माता पिता तथा बड़ों  की बातों को मानना चाहिए हमसे बुद्धि तथा उम्र से बड़े उनमे और हमें सोंचने और समझने और  बुरा - भाला की अच्छी समझ होती है। हमें कभी जीवन में मुसीबत के समय निडर और अडिग रहना चाहिए मुसीबत में मुँह मोड़ लेना बुद्धि मानी नहीं है। उनसे सामना करना चाहिए क्योकि डर के आगे जीत है।
 

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