moral story Hindi Mein पांच प्रसिद्ध कहानियाँ Best 5

moral story Hindi Mein पांच प्रसिद्ध कहानियाँ Best 5

moral story Hindi Mein पांच प्रसिद्ध कहानियाँ Best 5

moral story Hindi Mein पांच प्रसिद्ध कहानियाँ Best 5.


 moral story Hindi Mein short stories with morals for kids. Collection of Short story in Hindi-  1.चोर के मुँह में तिनका, 2.रोटी का सवाल,  3.पानी और प्यासा कौआ, 4.लालच का फल,  5. खट्टे अंगूर Hindi short stories below are 5 very interesting stories written in Hindi. I hope you will like this Hindi story collection.


moral story Hindi Mein
moral story Hindi Mein


 moral story Hindi Mein 
short stories with morals for kids. Collection of Short story in Hindi-  1.चोर के मुँह में तिनका, 2.रोटी का सवाल,  3.पानी और प्यासा कौआ, 4.लालच का फल,  5. खट्टे अंगूर

दोस्तों ! आपने बचपन में कई  नैतिक शिक्षाप्रद की कहानियाँ जरुर पढ़ी होगी. मैंने तो बहुत पढ़ी, बचपन में बहुत कहानियाँ पढ़ता था. जो (Knowledge ) ज्ञान देने के साथ – साथ मेरा मनोरंजन भी करती थी.


 मैं आपके साथ अपने बचपन की नैतिक शिक्षाप्रद  की 5 प्रसिद्ध कहानियाँ साझा  कर रहा हूँ जो मुझे बहुत पसंद है. इन कहानियों को पढने से न सिर्फ आपको मजा आएगा बल्कि आपको ज्ञान भी मिलेगा.



moral story No. 1    खट्टे अंगूर  (The Grapes Are Sour)

एक समय   की बात है। एक  लोमड़ी बहुत भूखी थी. वह भोजन की तलाश में बहुत दूर तक चल पड़ी थी  इधर – उधर भटकती रही पर लोमड़ी को  कही  भी  खाने को नहीं मिला .

बेचारी लोमड़ी बाई थक गई थी. फिर  थका  हारकर धीरे - धीरे  चलते - चलते  एक अंगूर का पेड़ मिला रस्ते में वहीँ  पहुँच गयी. वहां उसने अंगूर की  फल  देखी. जिसपर अंगूर के गुच्छे लगे थे. उसके मुँह से लार टपक पड़ी  लोमड़ी बाई की ?

लोमड़ी अंगूर के फल को  देखकर बहुत खुश हुई.  इससे मेरी भूख मिट जाएगी। वह अंगूरों को खाना चाहती थी, लेकिन   अंगूर का फल  बहुत उचाई में फला  था .

 लोमड़ी ने  अंगूरों को खाने के लिए  लोमड़ी ने ऊँची – ऊँची छलांगे  लगाने का प्रयास किया और छलाँगे लगाने लगी. पर लोमड़ी ने  अंगूर  तक पहुँच ही  न सकी.

 लोमड़ी  ऐसा करते – करते  बहुत बार हुई पर और भी  थक चुकी थी. आखिर वह आगे चलने लगी और जाते - जाते उसने  कहने लगी ये  अंगूर तो बहुत  खट्टे होते है. अगर मैं अंगूर  खाऊँगी तो बीमार हो जाउंगी. लोमड़ी बाई


 moral story HINDI  इस कहानी से शिक्षा :


दोस्तों कभी भी हो हमें हर चीज या हालात में हमेशा अच्छाई ढूंढनी चहिये. हम अगर कोई चीज प्राप्त नहीं  कर सके तो उसे बुरा नहीं कहना चाहिए. रामु की बेटी मेरे से नहीं पटी  उसने मुझे भाव नहीं दी तो उसमे बुराइयाँ ढूडने लगते है। ओ लड़की अच्छी नहीं उसकी आदत ख़राब है।

बहुत सारे लोगो में  प्रॉब्लम होती है अगर किसी चीज हमे प्राप्त  नहीं हुए या कोई काम कर न सके तो  खुद में कमियां देखने के बजाय उस काम पर  कमियाँ निकालने लगते है. मनुष्य में ये कमजोरियाँ नहीं होनी चाहिए  जैसे  लोमड़ी की तरह अंगूर खट्टे है कभी नहीं कहना चाहिए  है.



moral story No. 2 –एक चतुर लोमड़ी चोर के मुँह में तिनका (A Clever Fox)


एक लोमड़ी बहुत भूखी थी। वह अपनी भूख को संतुष्ट करने के लिए भोजन की तलाश में इधर-उधर भटकने लगी। जब उसे पूरे जंगल में भटकने के बाद भी कुछ नहीं मिला, तो वह गर्मी और भूख से परेशान होकर एक पेड़ के नीचे बैठ गई।

अचानक उसकी नज़र ऊपर गई। पेड़ पर एक कौआ बैठा था। उसके मुँह में रोटी का एक टुकड़ा था। जो कौवे ने कही  से चुरा कर लाया था।  कौआ को  देखकर लोमड़ी ने अपना मुँह भर लिया। लोमड़ी की लार टपकने लगा  वह कौवे से रोटी छीनने का उपाय सोचने लगी।

फिर उसने कौए से कहा, "क्यों भाई कौआ! तुमने सुना है कि मैं बहुत अच्छा गाना गाता हूँ। मै बड़ी दूर से तुम्हे ढूंढते हुए आ रहा हूँ।  क्या तुम  गीत सुनाओगे उसकी  बातों में कौवा उसकी तारीफ सुनकर बहुत खुश हो गया और  वह लोमड़ी की बातों में आ गया।

 कौवा   जैसे ही उसने  मुँह खोला । गीत गाने के लिए मुंह, से  रोटी का टुकड़ा नीचे गिर गया। लोमड़ी ने जल्दी से टुकड़ा उठाया और भाग गई। अब कौए को अपनी मूर्खता पर पछतावा होने लगा।चोरी के ऊपर सीना जोरी -


moral story इस कहानी से शिक्षा:


यह लघुकथा हमें स्पष्ट संदेश देती है कि हमें कभी भी झूठी प्रशंसा से बचना चाहिए। हमारे जीवन में कई बार हमें ऐसे कई लोग मिलते हैं, जो हमसे अपना महत्वपूर्ण काम निकालने के लिए झूठी प्रशंसा करते हैं। एक बार जब वे हमसे अपना काम निकाल लेते हैं, तो वे हमसे दोबारा पूछते भी नहीं हैं। इसलिए हमेशा झूठी प्रोसेसिंग से बचें।

. 3 – एक रोटी का सवाल 


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एक घर  में दो बिल्लियाँ रहती थी. एक दिन उन्हें रोटी का एक टुकड़ा मिला. वे दोनों आपस में लड़ने लगी.  रोटी के टुकड़े को  बाँटना चाहती थी पर  उन्हें कोई रास्ता  नहीं मिल पाया. और बिल्लियों में लड़ाई धूम मची गई

उसी समय एक बन्दर मामा आ गया . बंदर ने  बिल्लियों से लड़ने का कारण पूछा.  बन्दर  बहुत ही चालाक था  थाबिल्लियों ने उसे सारी बात सुनाई. बन्दर ने तरकीब निकला , मैं तुम्हारी रोटी को बराबर बाँट देता हूँ. 

 वह तराजू ले आया और बोला,   – एक पलड़े में रख दिए. उसने रोटी के दो टुकड़े लेकर एक दूसरे  पलड़े में   वह बन्दर तराजू में जब रोटी को तोलता तो जिस पलड़े में रोटी अधिक होती, बन्दर उसे थोड़ी – सी तोड़ कर खा लेता बन्दर मामा।

इस प्रकार थोड़ी – सी रोटी बची. बिल्लियों ने  रोटी वापस मांगी.  हमारा रोटी दो कहा पर  बन्दर ने बची  हुई  शेष रोटी भी मुँह में डाल दिया. और बन्दर रस्ते निकल लिया  फिर बिल्लियाँ उसका मुँह देखती रह गई.अपनों की लड़ाई में दूसरे मजे करते  आज के युग में मियाँ बीबी लड़ाई करते है ,तो पड़ोसी मजा लेता है।


( HINDI moral story)इस कहानी से शिक्षा :


 आपने सुना होगा की कभी भी हमें आपस में लड़ना नहीं चाहिए. कोई भी दोस्त या परिवार तब तक बहुत मजबूत होता है, जब तक उनमे  इस्या का भाव  न हों  उनमे आपसी प्यार और विश्वास होता है.

 आपस में लड़ने लग जाते है तो इससे दूसरे लोग भी फायदा उठाते है. वह इस लड़ाई को बड़ा बनाकर अपना मुनाफा ढूंढ लेते है. और अपना रोटी सेंकने लग जाते है  इसलिए लड़ने से अच्छा है एक साथ रहना. कोई  भी  मुसीबत को मिलकर दूर कर सकते है एकता में बड़ी ताकत होती हो। जैसे  राम और सुग्रीव ?



crow story in Hindi with moral story No.4   पानी और प्यासा कौआ...


गर्मियों के दिन थे। दोपहर में बहुत कड़ी  गर्मी थी। एक कौआ पानी की तलाश में इधर-उधर भटक रहा था। लेकिन उसे कहीं भी पानी नहीं मिला। अंत में  थके हुए एक  बगीचे में आता है। वह एक पेड़ की शाखा पर बैठा था  अचानक उसकी नजर पेड़ के नीचे पड़े एक घड़े पर गई। वह घड़े के पास उड़ गया।

वहां उसने देखा कि घड़े में कुछ पानी है। वह पानी पीने के लिए झुकी लेकिन उसकी चोंच पानी तक नहीं पहुँच सकी। ऐसा इसलिए हो रहा था क्योंकि घड़े में पानी कम था। कौआ का दिमाग ख़राब बेचार प्यासा उसी समय कोयल रानी मिली।

कोयल ने कौवये  से पूछा कहाँ अकेले भटक रहे हो शादी क्यों नहीं कर लेते काउओये ने कहा भाई - जिंदगी में इतनी कौओ - कौओ है फिर और कितना कौओ - कौओ करोगे ?

लेकिन वह कौवा निराश नहीं हुआ बल्कि पानी पीने के तरीके सोचने लगा। फिर उसने एक उपाय सोचा। वह चारों ओर बिखरे कंकर को उठाकर घड़े में डालने लगा। पानी में लगातार कंकड़ डालने से पानी ऊपर आ गया। फिर उसने आराम से पानी पिया और उड़ गया।

इस कहानी से शिक्षा: Hindi moral Kahani


जहां कोई मित्र है, वहां एक मार्ग है। कौवे पानी के बहुत प्यासे थे। उसे पानी की बड़ी जरूरत थी। जब उसे घड़े में पानी मिला तो उसने आइडिया की तलाश शुरू की और पानी पीने में भी कामयाब रहा।

हमें इस कहानी से यह भी सीखना चाहिए कि अगर हमें भी कुछ पाना है या हमें भी सफल होना है, तो हमें पहले यह सोचना चाहिए कि हमें भी सफल होना चाहिए।

यदि हम सफल होने के लिए अपने कदम उठाते हैं, तो हम आसानी से सफलता प्राप्त करने के तरीके खोज लेंगे। जहाँ भी इच्छा होती है, वहाँ हमेशा आविष्कार की जननी होती है।

moral story कहानी नंबर 5 - लालच का फल


 एक कुत्ता था। वह बहुत लालची किस्म का  था। एक दिन उसने पुरेगांव में  भोजन की तलाश में इधर-उधर भटकता रहा। सुबह से साम होने  पर उस दिन  कहीं भी खाना नहीं मिला।  कुत्ता बेचारा परेशान हो गया पापी पेट का सवाल है।

 अंत में, उन्हें एक होटल के बाहर मांस का एक टुकड़ा मिला। उसे लेकर बहुत जोर से भगा  वह उसे अकेले  में बैठकर  आराम से खाना चाहता था। पर लोगों की भीड़ भाड़ और उनके बिरादरी वाले भी थे , इसलिए वह इसे लेकर भाग गया।

एकांत जगह की तलाश करते हुए - बहुत ही दूर निकल गया  वह एक कुआँ  के किनारे पहुंचा। अचानक उसने कुआँ  में अपनी छाया देखी। वह समझ गया कि पानी में एक और कुत्ता है जिसके मुँह में मांस का  एक और  टुकड़ा भी है। कुत्ता सोचा ये तो सोने में सुहागा हो गया कुत्ता बहुत हो गया

 क्यों न इसका एक टुकड़ा मांस छीन के  ले लिया जाए, तो खाने और भी अधिक  मजा दोगुना हो जाएगा। कम से कम दो दिन आराम से रह  सकता हूँ।  कुत्ता ने  उस पर जोर से भौंकता है।  और कुत्ता मुँह खोला  मांस का अपना टुकड़ा भी भौंकने के कारण कुआँ में गिर गया।

 अब उसने अपना मिला हुआ मांस  टुकड़ा भी खो दिया। कुत्ता को  बहुत अफ़सोस और दुःखी हुआ और वह मुँह लटकाए हुए कुत्ता  गाँव वापस आ गया। और उसे एक सबक मिल गया ?

इस कहानी से शिक्षा: 


लालच एक भयानक बुरी आत्मा है।  हमें  लालच नहीं करना चाहिए। कोई भी व्यक्ति जो कर्जे  लेता है वह  जीवन में कभी खुश  नहीं रह सकता है। क्योकि दिमाग उसी पे अटका रहता है। 

 गरीब आदमी दूर जाता है,  खाना बनाने के लिए और अमीर दूर तक जाता है। उसे पचाने के लिए।  हमें अपनी मेहनत या किस्मत में है उतना ही मिलता है। जो भी हो  उससे अपना काम निकलवाना चाहिए।

 अधिक धन अधिक चिंता कम कमाओ कम खाओ सुखी रहो ? जैसे कबीर जी कहते ( हे प्रभु मोहें  इतना ही धन दीजिए मैं कभी भूखा न राहु और न ही  साधु भूखा जाये ?

 हम  थोड़ा अधिक लोभ करते हैं, तो हमें अपने हाथों को और भी अधिक धोना पड़ सकता है। लोभ चिंता का कारण है, इसीलिए कहा जाता है  लालच  एक बुरी बाला  है, इसे अपने पास मत रहने देना

दोस्त! हमें पूरी उम्मीद है आपको नैतिक शिक्षा  की ये 5 प्रसिद्ध कहानियाँ पसंद आई होंगी। अपनी राय जरूर दें?















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